लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
भारतीय सनातन परंपरा में धाम यात्रा को आत्मा के उत्थान का एक महत्वपूर्ण साधन माना गया है। यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा नहीं होती, बल्कि यह उस आंतरिक यात्रा का प्रारंभ है, जिसमें मनुष्य अपने भीतर बसे दिव्य तत्व को पहचानने का प्रयास करता है। जब श्रद्धालु ईश्वर के धाम की ओर कदम बढ़ाता है, तो उसके भीतर भक्ति, शांति और समर्पण का भाव स्वतः जागृत होने लगता है।
इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य श्री शिवशक्ति अनुग्रह पीठ के प्रमुख परम पूज्य प्रशांत महाराज जी के पावन सान्निध्य में निरंतर किया जा रहा है। प्रशांत महाराज जी एक ऐसे संत हैं, जिन्होंने अपने जीवन को पूर्णतः धर्म, सेवा और साधना के मार्ग में समर्पित कर दिया है। उनका उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक सनातन के मूल्यों — सेवा, करुणा और समर्पण — को पहुँचाना है।
महाराज जी का जीवन इस बात का प्रतीक है कि सच्ची साधना केवल एकांत में नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर निस्वार्थ सेवा करने में है। उनके मार्गदर्शन में अनेक धार्मिक एवं सामाजिक कार्य निरंतर संचालित हो रहे हैं, जिनका लक्ष्य मानव जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करना है। इन्हीं प्रमुख योजनाओं में से एक है — निःशुल्क धाम यात्रा, जिसके माध्यम से वे श्रद्धालुओं को भगवान के धाम से जोड़ने का पुण्य कार्य कर रहे हैं।
सनातन परंपरा की एक विशेषता यह भी रही है कि पूरे भारत में संतों, आश्रमों और धर्मपीठों द्वारा निःस्वार्थ भाव से निःशुल्क धाम यात्राएँ कराई जाती रही हैं। यह परंपरा इस सत्य को दर्शाती है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और परोपकार का भी जीवंत स्वरूप है।
इसी भावना के साथ संचालित यह निःशुल्क धाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः सेवा भाव से आयोजित की जाती है। इसमें आना-जाना, रहने की व्यवस्था तथा सात्विक भोजन — सभी सुविधाएँ बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से साधु-संतों, वयोवृद्धों एवं आर्थिक रूप से कमजोर भक्तों के लिए समर्पित है, ताकि वे भी बिना किसी चिंता के भगवान के पावन धाम के दर्शन कर सकें।
मथुरा धाम, जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है, भक्ति और प्रेम का एक अद्वितीय केंद्र है। वहाँ का दर्शन मन को अद्भुत शांति और आनंद प्रदान करता है और जीवन को एक नई आध्यात्मिक दिशा देता है।
इस सेवा कार्य के मूल में जो भाव निहित है, वह अत्यंत गूढ़ है —
“महाराज जी की सेवा ही शिवत्व है।”
अर्थात निस्वार्थ सेवा ही शिव की सच्ची उपासना है।
इस दिव्य कार्य को सफल बनाने में शिवशक्ति अनुग्रह पीठ परिवार के समर्पित सेवकों का महत्वपूर्ण योगदान है —
श्रीमती अनुराधा मिश्रा जी (अध्यक्ष), श्री सत्य प्रकाश जी (मुख्य संरक्षक), पूज्य माताजी पूनम मिश्रा जी, श्री C. D. दुबे जी, श्री संजय सिंह जी, श्री शारदा कांत पांडे जी, श्री अश्विन चतुर्वेदी जी एवं श्री प्रिंस मिश्रा जी — जिनकी निष्ठा, सेवा और समर्पण इस आयोजन को दिव्यता प्रदान कर रहे हैं।
अतः यह निःशुल्क धाम यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा, सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण और आध्यात्मिक जागरण का एक सशक्त माध्यम है।
शंकर महाराज जी की जय
जय सनातन धर्म
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